स्पेस टेक्नोलॉजी में चीन की नई छलांग, फिर भेजा रीयूजेबल स्पेसक्राफ्ट

नई दिल्ली|  चीन ने 7 फरवरी 2026 को एक बार फिर अपनी अंतरिक्ष ताकत दिखाते हुए एक ऐसे अंतरिक्षयान को लॉन्च किया है जिसे दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। यह लॉन्च चीन के जियूक्वान सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से लॉन्ग मार्च-2F रॉकेट के जरिए किया गयाहै। खास बात यह है कि साल 2020 के बाद यह चौथी बार है जब चीन ने इस तरह के “रीयूजेबल” यानी पुनः उपयोग योग्य अंतरिक्षयान को अंतरिक्ष में भेजा है।

 

सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, इस मिशन का मकसद नई तकनीकों का परीक्षण करना है। वैज्ञानिक यह देखना चाहते हैं कि अंतरिक्षयान को किस तरह सुरक्षित तरीके से बार-बार अंतरिक्ष में भेजा और वापस लाया जा सकता है। हालांकि अभी यह नहीं बताया गया है कि यह अंतरिक्षयान कितने दिनों तक अंतरिक्ष में रहेगा। और इसके बारें में अभी और जानकारी भी नहीं दी गई है। 

 

चीन ने पहली बार ऐसा अंतरिक्षयान सितंबर 2020 में भेजा था, जो करीब दो दिन तक अंतरिक्ष में रहा था। इसके बाद 2022 में भेजा गया यान लगभग 276 दिनों तक कक्षा में रहा और सुरक्षित वापस लौट आया था। साथ ही तीसरी उड़ान भी लंबे समय तक अंतरिक्ष में रही और सफलतापूर्वक पृथ्वी पर उतरी। और अब चौथी उड़ान के साथ चीन यह दिखाना चाहता है कि वह इस तकनीक में लगातार सुधार कर रहा है और उसे प्रत्येक बार बेहतर करते जा रहा है। हालाँकि इस यान के बारें में ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है। 

 

दरअसल, आमतौर पर जो अंतरिक्षयान होते है उन्हें एक बार इस्तेमाल होने के बाद दोबारा उपयोग में नहीं ला सकते है, जिस कारण खर्च भी बहुत ज्यादा होता है। लेकिन अगर कोई अंतरिक्षयान बार-बार उड़ान भर सके तो उससे मिशन की लागत कम हो जाती है और उससे ज्यादा प्रयोग किए जा सकते हैं। यही वजह है कि दुनिया के कई देश इस दिशा में काम कर रहे हैं।

 

और चीन का यह कदम दिखाता है कि वह अंतरिक्ष तकनीक में आत्मनिर्भर बनने और भविष्य के बड़े मिशनों की तैयारी कर रहा है। आने वाले समय में ऐसी तकनीक अंतरिक्ष यात्रा को आसान और सस्ता बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।



नई दिल्ली| अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA को अपने बहुत समय से इंतज़ार कर रहे चंद्र मिशन Artemis II की लॉन्चिंग टालनी पड़ी है। यह मिशन इंसानों को चाँद के पास दोबारा ले जाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। लेकिन लॉन्च से पहले किए गए एक अहम परीक्षण के दौरान रॉकेट में ईंधन रिसाव यानि फ्यूल लीक पाए जाने के कारण इसे कम से कम एक महीने के लिए आगे बढ़ा दिया गया है।

 

दरअसल, NASA ने अपने शक्तिशाली स्पेसलॉन्च सिस्टम रॉकेट की “ड्रेस रिहर्सल” यानी अंतिम तैयारी परीक्षण किया था। इस परीक्षण में रॉकेट में तरल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन भरी गई, ठीक वैसे ही जैसे असली लॉन्च के समय किया जाता है। लेकिन जांच के दौरान इंजीनियरों ने हाइड्रोजन के रिसाव का पता लगाया और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए NASA ने तुरंत लॉन्च की तारीख आगे बढ़ाने का फैसला किया और इसे एक महीने के लिए टाल दिया गया है। 

 

अब इस मिशन की नई संभावित तारीख मार्च 2026 बताई जा रही है। NASA का कहना है कि पहले तकनीकी खामियों को पूरी तरह ठीक किया जाएगा, फिर दोबारा परीक्षण होगा और उसके बाद ही अंतिम लॉन्च की तैयारी की जाएगी।

Artemis II मिशन इसलिए खास है क्योंकि इसमें चार अंतरिक्ष यात्री चाँद के चारों ओर लगभग 10 दिन की यात्रा करेंगे। यह 1972 के बाद पहला मौका होगा जब इंसान चाँद के इतने करीब जाएंगे। यह मिशन आगे आने वाले Artemis III मिशन की तैयारी भी है, जिसमें अंतरिक्ष यात्रियों को चाँद की सतह पर उतारने की योजना है। 

 

हालांकि देरी से अंतरिक्ष प्रेमियों को थोड़ा इंतजार जरूर करना पड़ेगा, लेकिन NASA ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। चाँद तक की यह यात्रा भले कुछ समय के लिए रुकी हो, लेकिन मानव अंतरिक्ष अभियान की दिशा में यह कदम बेहद महत्वपूर्ण बना हुआ है। जैसे ही सभी सुरक्षा जाँच पूर्ण हो जाएगी तो पुनः एक बार परीक्षण होगा और अंतिम उड़ान भरी जाएगी।